Best PCS coaching institute in Dehradun| मानस खंडमाल प्रोजेक्ट चुनौतियाँ |
Best PCS coaching institute in Dehradun| मानस खंडमाल प्रोजेक्ट चुनौतियाँ |
प्रस्तावना
उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रस्तावित मानस खंडमाल परियोजना एक बहुआयामी पहल है, जिसका प्रमुख उद्देश्य लघु व मध्यम जलविद्युत उत्पादन को बढ़ावा देना, स्थानीय आर्थिक विकास को गति देना, आजीविका के नए अवसर सृजित करना तथा कृषि व सिंचाई को पूरक रूप से सशक्त बनाना है।
प्रश्न 1: मानस खंडमाल प्रोजेक्ट क्या है और इसका संदर्भ उत्तराखंड में क्यों आया?
उत्तर:
मानस खंडमाल प्रोजेक्ट उत्तराखंड में एक क्षेत्रीय विकास परियोजना है, जिसका उद्देश्य जल संसाधनों का उत्पादक, स्थिर, दीर्घकालिक और पर्यावरण-अनुकूल उपयोग करना है। यह परियोजना मुख्यतः घाटी क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार, कृषि सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन और पर्यटन को बढ़ावा देने के इरादे से शुरू की गई थी। उत्तराखंड की पहाड़ी भौगोलिक संरचना, सीमित औद्योगिक आधार, उच्च बेरोजगारी दर व पलायन को रोकने तथा स्थानीय आजीविकाओं में विविधता लाने के दृष्टिकोण से इसकी प्रस्तावित रूपरेखा तैयार की गई।
प्रश्न 2: इस परियोजना से जुड़ी मुख्य प्रशासनिक चुनौतियाँ क्या हैं?
उत्तर:
मुख्य प्रशासनिक चुनौतियाँ इस प्रकार हैं:
1. विभागीय समन्वय की कमी
जल संसाधन, ऊर्जा, वन, स्थानीय शासन, आपदा प्रबंधन और परिवहन जैसे विभागों के बीच स्पष्ट साझा निर्देशावली का अभाव परियोजना निष्पादन में विलंब का कारण बनता है।
2. भूमि अधिग्रहण एवं अनुमति
प्रोजेक्ट के लिये भूमि अधिग्रहण, पट्टा पासिंग, पारदर्शिता और मुआवज़े को लेकर अक्सर विवाद खड़े हो जाते हैं।
3. कानूनी और नियामक अनुपालन
EIA (Environmental Impact Assessment), Forest Clearance, Wildlife Clearance, Land Use Change Orders और अन्य संबंधित अनुमतियों को समय पर हासिल करना कठिन होता है।
4. निगरानी और जवाबदेही
कार्य की समयबद्ध निगरानी तथा गुणवत्ता नियंत्रण में प्रशासनिक क्षमता की कमी दिखाई देती है।
ये चुनौतियाँ प्रोजेक्ट के सुचारू कार्यान्वयन में प्रमुख बाधाएँ हैं।
प्रश्न 3: पर्यावरण-आधारित चुनौतियाँ परियोजना के लिए क्यों गंभीर हैं?
उत्तर:
उत्तराखंड हिमालयी पारिस्थितिक तंत्र अत्यंत संवेदनशील और अस्थिर है। मानस खंडमाल जैसे परियोजना में पर्यावरण संबंधी गंभीर चुनौतियाँ आती हैं:
1. वनों की कटाई और जैव विविधता पर प्रभाव
जलविद्युत या जल प्रबंधन संरचनाओं के निर्माण के लिये पहाड़ी वनों की कटाई आवश्यक होती है, जिससे वनों की जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
2. नदी पारिस्थितिकी पर असर
मानस धाराओं में बाँध, चैनल या डाइवर्ज़न होने से नदी के पारिस्थितिकी चक्र पर प्रभाव, मछलियों और तटीय जीवों के आवागमन में बाधा आती है।
3. मिट्टी कटाव और भू-स्खलन
भारी मशीनरी, सड़क आदि निर्माण से ढलानों पर दबाव बढ़ता है, जिससे landslide और soil erosion की संभावना बढ़ती है।
4. ग्लेशियर और जल स्रोत पर प्रतिकूल प्रभाव
स्वयं प्रकृति की आकस्मिक गतिविधियाँ जैसे ग्लेशियल ग्लेड आउटबर्स्ट फ़्लड (GLOF), भारी वर्षा के दौरान नदी बहाव में उतार-चढ़ाव परियोजना को अप्रत्याशित जोखिमों के समक्ष लाते हैं।
इसलिए पर्यावरणीय जोखिम को उचित वैज्ञानिक अध्ययन के बिना परियोजना को आगे बढ़ाना भयानक परिणामों को जन्म दे सकता है।
प्रश्न 4: सामाजिक चुनौतियाँ (Social Challenges) क्या हैं?
उत्तर:
सोशल इम्पैक्ट काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे स्थानीय समुदायों के हित से जुड़ा है:
1. आजीविका और पलायन
भू-निर्भर समुदायों को भूमि उपयोग में बदलाव, जंगल, चराई भूमि और नदी के किनारे के उपयोग में बदलाव से आजीविका में अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।
2. पारंपरिक जीवनशैली में परिवर्तन
स्थानीय रीति-रिवाज, उपभोग की परंपराएँ और पारंपरिक सांस्कृतिक ताने-बाने में परिवर्तन आ सकता है।
3. समुदाय में असंतोष
मुआवज़ा, भूमि उपयोग, रोजगार लाभ, उपायों में पारदर्शिता की कमी से स्थानीय जनता में विरोध उभर सकता है।
4. प्रभाव-आधारित विस्थापन
आश्रित परिवारों को पुनर्वास, पुनर्स्थापना और पुनर्कल्पना के लिये प्रभावी नीति की आवश्यकता होती है, जो अक्सर अभाव में होती है।
समाज आधारित चुनौतियाँ प्रशासनिक योजनाओं का केंद्रबिंदु होनी चाहिए।
प्रश्न 5: वित्तीय/आर्थिक चुनौतियाँ क्या हैं?
उत्तर:
आर्थिक दृष्टि से परियोजना को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है:
1. पूंजी की उपलब्धता
लंबी अवधि के लिये पूंजी निवेश आवश्यक है और वित्तीय संसाधन सीमित हैं।
2. लागत में वृद्धि
ऊँची भौगोलिक लागत, खराब मौसम, प्रतिकूल निर्माण की परिस्थितियाँ लागत को बढ़ाती हैं।
3. लाभ-हानि संतुलन
जलशक्ति उत्पादन के लाभ भारित लागत की तुलना में क्या पर्याप्त होंगे, यह एक बड़ा सवाल है।
4. ऋण और वित्तीय सहायता
बैंक और वित्तीय संस्थाएँ हिमालयी जोखिम वाली परियोजना में ऋण देने से हिचकिचाती हैं।
ये समस्या परियोजना की व्यवहार्यता पर प्रश्न खड़े करती हैं।
प्रश्न 6: तकनीकी और निर्माण संबंधी चुनौतियाँ क्या हैं?
उत्तर:
मुख्य तकनीकी चुनौतियाँ:
1. कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ
टॉपोग्राफी, लैन्स के पतन, कठिन चट्टानी संरचना आदि।
2. मौसम आधारित रुकावट
बारिश और बर्फबारी के कारण निर्माण ठप पड़ सकता है।
3. डिज़ाइन की जटिलता
सुरक्षा, बांध डिज़ाइन, चैनल निर्माण, सर्वेक्षण की अनियमितता।
4. गुणवत्ता नियंत्रण
स्थानीय संसाधनों व बाहरी इंजीनियरों के बीच तालमेल और गुणवत्ता नियंत्रण कठिन।
इन तकनीकी बाधाओं के कारण कार्य की गुणवत्ता और समय पर पूर्णता प्रभावित होती है।
प्रश्न 7: परियोजना के लिए पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
EIA इसलिए आवश्यक है कि यह:
पर्यावरणीय जोखिमों को पहचानता है
डाटा-आधारित निर्णय बनाता है
जल, जंगल, जैव विविधता और स्थानीय जीवनचर्या पर प्रभाव का विश्लेषण करता है
पुनर्वास और प्रतिकूल प्रभाव को मापता है
सामुदायिक भागीदारी को सुनिश्चित करता है
EIA के बिना परियोजना को आगे बढ़ाना संवैधानिक, कानूनी और नैतिक दृष्टि से अनुचित है।
प्रश्न 8: परियोजना से जुड़े आपदा जोखिमों (Disaster Risks) पर आपकी क्या सोच है?
उत्तर:
प्राकृतिक आपदा जोखिम उत्तराखंड जैसी हिमालयी स्थिति में गंभीर हैं:
1. भूस्खलन (Landslide)
भारी वर्षा और निर्माण क्रम से टॉपोग्राफ़ी अस्थिर हो जाती है।
2. Flash Flood
गांव/नदी किनारे नागर निकासी की चुनौती।
3. भूकंप
हिमालय एक सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र है, जहाँ टेक़नोनिक गतिविधियाँ जोखिम बढ़ाती हैं।
4. ग्लेशियल झील आपदा
ग्लेशियरों का अचानक टूटना प्रोजेक्ट और आसपास के इलाकों के लिये खतरा।
इन जोखिमों से निपटने हेतु DRR (Disaster Risk Reduction) योजना अनिवार्य है।
प्रश्न 9: स्थानीय समुदायों की भागीदारी परियोजना के लिये क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर:
स्थानीय समुदाय:
1. भू-सांस्कृतिक ज्ञान
स्थानीय भूगोल, मौसम और जोखिम का अनुभव।
2. पारदर्शिता और समर्थन
समुदाय की साझेदारी से परियोजना को समर्थन मिलता है।
स्थानीय रोजगार और भागीदारी से असंतोष कम होता है।
4. निरंतर निगरानी
स्थानीय निगरानी से छोटी-छोटी विसंगतियों को पहचाना जा सकता है।
समुदाय-आधारित मॉनिटरिंग प्रशासनिक कार्य को अधिक प्रभावी बनाती है।
प्रश्न 10: नीति-निर्माण में किन सुधारों की आवश्यकता है?
उत्तर:
नीति सुधार:
1. क्षेत्रीय संवेदनशील भूमि उपयोग नीति
भूस्खलन/आपदा-जोखिम क्षेत्रों में निर्माण प्रतिबंध/नियमन।
2. पुनर्वास और पुनर्गठन नीति
सम्पूर्ण R&R पैकेज, आजीविका समर्थन, शिक्षा और प्रशिक्षण।
3. पर्यावरण संरक्षण
EIA, वन-क्लियरेंस, नदी पारिस्थितिकी महत्वों की सुरक्षित नीति।
4. पारदर्शी निवेश नीति
भूमि अधिग्रहण, मुआवज़ा, निवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता।
प्रश्न 11: PCS अधिकारी के रूप में आप परियोजना समन्वय कैसे सुनिश्चित करेंगे?
उत्तर:
समन्वय सुनिश्चित करने के उपाय:
Inter-departmental Task Force
Technology Enabled Monitoring
Weekly Coordination Meetings
Transparent Public Dashboards
Stakeholder Consultations
इन कदमों से परियोजना की जवाबदेही और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।
प्रश्न 12: परियोजना के वित्तीय जोखिमों के प्रति क्या समाधान हो सकते हैं?
उत्तर:
वित्तीय समाधान:
1. Multi-source Funding
सरकारी + बैंक ऋण + PPP मॉडल।
2. Risk Sharing Mechanisms
इंश्योरेंस, इन्फ्रा बॉन्ड, रीइन्वेस्टमेंट मॉडेल।
3. Phased Investment
चरणबद्ध निवेश से बजट तनाव कम।
4. Monitoring and Audit
वित्तीय निरीक्षण और ऑडिट।
प्रश्न 13: परियोजना में तकनीकी श्रेष्ठता कैसे सुनिश्चित करेंगे?
उत्तर:
तकनीकी श्रेष्ठता सुनिश्चित हेतु:
1. Outsourced Technical Audits
विशेषज्ञों द्वारा गुणवत्ता समीक्षा।
2. Best Practices Adoption
Smart materials, Geo-techniques, Slope stabilization।
3. Capacity Building Workshops
स्थानीय इंजीनियरों के लिये प्रशिक्षण।
4. Drone & GIS Based Supervision
निगरानी में सटीकता।
प्रश्न 14: परियोजना के पर्यावरणीय अनुकूल विकल्प क्या हो सकते हैं?
उत्तर:
1. Bio-engineering Approaches
जैविक ढलान सुरक्षा।
2. Renewable Energy Components
Solar, micro-hydel integration।
3. Zero Waste Construction
कचरा न्यूनिकरण।
4. Controlled Quarrying
पर्यावरणीय मानकों के साथ।
प्रश्न 15: परियोजना को दीर्घकालिक और टिकाऊ कैसे बनाएँगे?
उत्तर:
दीर्घकालिक टिकाऊता हेतु:
Community Participation
Scientific Risk Assessments
Periodic Review Mechanisms
Balanced Land Use Planning
Institutional Strengthening
निष्कर्ष
मानस खंडमाल प्रोजेक्ट उत्तराखंड की भू-आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक प्राथमिकताओं को संयुक्त रूप से प्रोत्साहित करता है। लेकिन इसके क्रियान्वयन में जटिल प्रशासनिक, तकनीकी, पर्यावरणीय, वित्तीय और समुदाय-जोड़ी समस्याएँ हैं।
PCS इंटरव्यू में इस विषय पर जब प्रश्न पूछा जाए तो उम्मीदवार को:
संतुलित दृष्टिकोण
संवैधानिक तथा नीतिगत ज्ञान
स्थानीय सामाजिक समझ
व्यवहारिक समाधान सुझाव
के साथ जवाब देना चाहिए।
एक सफल प्रशासक वही है जो विकास को पर्यावरण और समाज के साथ संतुलित कर सके।
